लाड़ली की मौत का कौन जिम्मेदार / एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म, 2 महीने की बच्ची ने मां की गोद में दम तोड़ा

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मैं आज माटी में मिल रही हूं...मां अगर मुझे एंबुलेंस में इतनी ऑक्सीजन मिलती रहती कि मैं डॉक्टरों तक पहुंच जाती तो मैं भी आपके आंचल में खेलती रहती।

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 10:38 AM IST

गुना. एंबुलेंस 108 से रेफर की गई बच्ची की ग्वालियर पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। उसे निमोनिया और हार्ट में समस्या थी। उसे गुना के जिला अस्पताल से मंगलवार शाम ग्वालियर रेफर किया गया था। लेकिन 35 किलोमीटर दूर म्याना पहुंचते-पहुंचते एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म हो गई। जब तक दूसरी गाड़ी आई बच्ची ने तड़प-तड़प कर मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। असंवेदनशीलता की हद तो तब हो गई तब मामले को दबाने के लिए एंबुलेंस का ड्राइवर शव को ही आक्सीजन लगाकर शिवपुरी ले गया। 

मृतक बच्ची के पिता का कहना है कि शिवपुरी में हम अपनी 2 माह की बेटी के शव को लेकर इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन किसी ने भी सुनवाई नहीं की। हमें वापस गुना आने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूरन प्राइवेट गाड़ी की तब घर लौटे, इसका किराया भी कर्ज लेकर चुकाया है। सीएमएचओ पी बुनकर का कहना है कि फरियादी के बयान लेकर कार्रवाई की जाएगी। 

रेफर करने के 5 घंटे बाद मिली थी एंबुलेंस

आरोन के गुलाबगंज निवासी अनिल वंशकार की दो माह की बेटी कनक की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इस वजह से परिजन उसे सोमवार को जिला अस्पताल लेकर आए, जहां उसको रात में भर्ती किया गया। जांच के दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ ने बच्ची को निमोनिया और हार्ट में समस्या बताई, मंगलवार दोपहर उसे 1 बजे ग्वालियर रेफर किया गया था, लेकिन एंबुलेंस शाम 6 बजे आई।

व्यवस्था पर सवाल

बच्ची को जिस एंबुलेंस 108 से ग्वालियर लेकर जा रहे थे, म्याना निकलने के बाद ही इसकी ऑक्सीजन खत्म हो गई। सवाल ये है कि एक एंबुलेंस में 14 किलो आक्सीजन होती है तो 200 किमी के सफर में ही यह खत्म कैसे हो गई? 

इंचार्ज ने कहा-तकनीकी खराबी आई
ऑक्सीजन खत्म होने के सवाल पर जिगित्सा हेल्थ केयर के समन्वयक गिर्रराज तोमर ने कहा कि एंबुलेंस में में तकनीकी खराबी आ गई थी। हालांकि, क्या खराबी आई वे यह नहीं बता पाए।

माता-पिता को किराए का वाहन लेकर आना पड़ा
बच्ची के पिता अनिल वंशकार का कहना है कि उनकी दो माह की बेटी म्याना के पास ही ऑक्सीजन न मिलने से खत्म हो चुकी थी। लेकिन हमें जबरन ड्राइवर शिवपुरी तक ले गया। वापस गुना आने के लिए शिवपुरी में भी कई लोगों के हाथ जोड़े, पैर पकड़े। लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। एक प्राइवेट वाहन चालक ने 5 हजार मांगे, लेकिन हमारी स्थिति देखकर वह 3 हजार रुपए में छोड़ने के लिए राजी हुआ, तब जाकर मंगलवार रात गुना पहुंचे।

असंवेदनशील: शव को लगा दी ऑक्सीजन
एंबुलेंस के स्टाफ ने देखा कि बच्ची के परिजन गुस्से में हैं तो उन्हें दिलासा देते हुए कहा कि अभी सांस चल रही है। इसके बाद शव को ही ऑक्सीजन लगा दी और सीधे शिवपुरी जिला अस्पताल पहुंचा। वहां डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि की। परिजन यह सुनकर रोने लगे और ड्राइवर से कहा कि हमें वापस गुना ले चलो, तो बोला नियम में नहीं है। शिवपुरी में उन्हें छोड़कर एंबुलेंस  गुना आ गई।