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CBSE Board Exams 2020 : 10वीं-12वीं बोर्ड एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स को मिली राहत, अब अपने गृह जिले में दे सकते हैं परीक्षा

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कोरोना वायरस संकट के कारण हजारों बच्चे अपने गृह प्रदेश में चले गए थे, ऐसी स्थिति में सीबीएसई 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो रहे विद्यार्थियों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फैसला किया है कि लॉकडाउन के दौरान एक अलग राज्य या जिले में चले गए उम्मीदवार वहां कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा देने का विकल्प चुन सकते हैं। इस कदम से न केवल बोर्डिंग स्कूलों के हजारों छात्रों को राहत मिलेगी, बल्कि कोटा जैसे कोचिंग हब में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए भी एक अच्छा कदम है।

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, "कक्षा 10 और कक्षा 12 के छात्र जो लॉकडाउन के दौरान अलग-अलग राज्य या जिले में चले गए हैं, वहां पेंडिंग बोर्ड परीक्षा दे सकते हैं।" मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फैसला किया है कि लॉकडाउन के दौरान एक अलग राज्य या जिले में चले गए उम्मीदवार वहां कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा देने का विकल्प चुन सकते हैं। इसके साथ ही निशंक ने यह भी कहा कि लंबी दूरी को देखते हुए छात्रों सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य कोरोना रोधी नियमों का पालन करना होगा, साथ ही प्रत्येक स्कूल को भी इन नियमों को अपने यहां कड़ाई से लागू कराना अनिवार्य है।
इससे पहले, मंत्री ने घोषणा की थी कि CBSE अपनी कक्षा X और XII की बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को उनकी पसंद का केंद्र बनाने के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या 3,000 से बढ़ाकर 13,000 कर देगा।

कोरोनावायरस के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्कूल और उनके छात्र इस दुविधा में थे कि क्या उन्हें इन परीक्षणों को लेने के लिए सैकड़ों मील की यात्रा करनी होगी, परीक्षा सेंटर तक मीलों का सफर तय करके पहुंचना स्कूलों और बच्चों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या थी, ऐसे में बोर्ड के इस फैसले ने स्कूलों और छात्र-छात्राओं को राहत दी है। निशंक ने जानकारी देते हुए बताया 661 आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित हैं, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, ऐसे में अपने छात्रों के लिए स्कूलों को वायरस सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था करनी होगी। एचआरडी मंत्रालय के इस फैसले ने छात्रों और स्कूलों के लिए इसे आसान बना दिया है। अब बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों को इस समस्या से निजात मिल गई है।