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नई पीढ़ी के टेस्ट से एक बार में होगी कोरोना के 50 हजार नमूनों की जांच

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कोरोना संक्रमण के खिलाफ जंग में देश ने अपनी टेस्टिंग क्षमता में खासा इजाफा किया है। अब सीएसआईआर जल्द ही एक नया टेस्ट लाने जा रहा है, जिसमें 50 हजार नमूनों की जांच एक बार में संभव होगी। न्यू जनरेशन सिक्वेंसिंग टेस्ट को तैयार किया है सीएसआईआर की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला ‘सेंटर फॉर सेलुलर एंड मालीक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी)' ने।

सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे ने 'हिन्दुस्तान' से विशेष बातचीत में बताया कि यह टेस्ट सर्विलांस के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। किसी क्षेत्र विशेष में कोरोना संक्रमण की जांच करनी हो तो इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नए टेस्ट में लोगों के स्वैब नमूने लेकर उनके आरएनए की नेक्स्ट जनरेशन सिक्वेंसिंग की जाती है। इसके बाद हजारों टेस्ट एक साथ करना संभव है।

पूल्ड टेस्ट से कहीं ज्यादा किफायती: सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि यह पूल्ड टेस्ट जैसा ही है, लेकिन काफी व्यापक। पूल्ड टेस्ट में 20-25 से ज्यादा नमूने मिलाने पर रिपोर्ट गलत आने का खतरा हो सकता है, जबकि ये आरएनए सिक्वेंसिंग टेस्ट है, जिसमें ज्यादा सैंपल मिलाने पर भी सटीक नतीजे आते हैं। नतीजतन यह टेस्ट बेहद किफायती होता है।

संक्रमित नमूने की पहचान मुमकिन: दूसरे, पूल्ड आरटीपीसीआर टेस्ट में यदि दस नमूने मिलाकर जांच की जाती है और उनमें से कोई एक भी पॉजिटिव आता है तो यह पता नहीं चल पाता है कि कौन-सा सैंपल संक्रमित है। ऐसी स्थिति में तब सभी दस सैंपल की अलग-अलग जांच करनी पड़ती है। इस टेस्ट में यदि हजारों में से कोई एक सैंपल भी पॉजिटिव आता है तो उसे पहचानना संभव है, क्योंकि सभी नमूनों की कोडिंग पहले ही कर ली जाती है।

एक महीने में बाजार में आएगा टेस्ट: डॉ. मिश्रा के मुताबिक बेंगलुरु की एक कंपनी के साथ इस बाबत समझौता होने जा रहा है, जो इसे बाजार में उतारेगी। लेकिन इससे पहले इसका परीक्षण करने और उसके बाद आईसीएमआर की मंजूरी लेना जरूरी होगा। अगले एक महीने के भीतर ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो सकती हैं।

दूसरे, पूल्ड आरटीपीसीआर टेस्ट में यदि दस नमूने मिलाकर जांच की जाती है और उनमें से कोई एक भी पॉजिटिव आता है तो यह पता नहीं चल पाता है कि कौन-सा सैंपल संक्रमित है। ऐसी स्थिति में तब सभी दस सैंपल की अलग-अलग जांच करनी पड़ती है। इस टेस्ट में यदि हजारों में से कोई एक सैंपल भी पॉजिटिव आता है तो उसे पहचानना संभव है, क्योंकि सभी *नमूनों की कोडिंग पहले ही कर ली *जाती है।

एक महीने में बाजार में आएगा टेस्ट: डॉ. मिश्रा के मुताबिक बेंगलुरु की एक कंपनी के साथ इस बाबत समझौता होने जा रहा है, जो इसे बाजार में उतारेगी। लेकिन इससे पहले इसका परीक्षण करने और उसके बाद आईसीएमआर की मंजूरी लेना जरूरी होगा। अगले एक महीने के भीतर ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो सकती हैं।